छत्तीसगढ़
बाल विवाह मुक्त बनाने प्रशासन की बड़ी पहल, जागरूकता अभियान तेज
Shantanu Roy
20 Nov 2025 9:11 PM IST

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Raigarh. रायगढ़। जिले को 31 मार्च 2029 से पहले पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित करने लक्ष्य को लेकर प्रशासन ने जन-जागरूकता कार्यक्रमों को तेज कर दिया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लगातार कार्यशालाएं, जागरूकता कार्यक्रम और गांवों में सभाएं आयोजित की जा रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी एल.आर. कच्छप ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करना है। इसी कड़ी में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया गया, जिसमें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों, कर्मचारियों और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को बाल विवाह रोकने की शपथ भी दिलाई गई।
कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मचारी और चाइल्ड हेल्प लाइन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कच्छप ने बताया कि जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिशन शक्ति समूह, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 टीम द्वारा गांवों, स्कूलों और सामुदायिक बैठकों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों और अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है तथा नारा लेखन के माध्यम से सामाजिक चेतना बढ़ाई जा रही है। सरकार द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर और ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अधिसूचित किया गया है। कोई भी व्यक्ति बाल विवाह की सूचना सीधे इन अधिकारियों को दे सकता है। इसके अलावा चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 पर भी सूचना दी जा सकती है।
जिसमें शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। जिले के कई ग्राम पंचायतों में आयोजित सभाओं में बाल विवाह निषेध प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए जा रहे हैं। पंचायतें अपने गांवों को बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। कच्छप ने बताया कि बालिकाओं की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। यदि किसी परिवार द्वारा नाबालिग की शादी कराई जाती है या किसी प्रकार का सहयोग किया जाता है, तो जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक की कठोर सजा का प्रावधान है। नाबालिगों की जबरन शादी कराने में शामिल परिजन, पुरोहित और आयोजनकर्ता भी अपराधी माने जाएंगे और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि समाज और पंचायतें मिलकर प्रयास करें, तो जिले को लक्ष्य तिथि से पहले ही बाल विवाह मुक्त घोषित करना संभव है।
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